Monday, May 31, 2021

WOMAN EDUCATION

 

                                    नारी शिक्षा -

प्राचीन काल से हींनारी को,
अलग दृष्टि से पाला थासंभाल कार्य सिर्फ घर का,
यही महत्व कर डाला था |

पर आज जाकर जाना हमनेउनके बढ़ने का ऐसास,
नहीं रहेगा पिछड़ा फिरआने वाला कल फिर पास |

रहती सदा आत्म-विश्वासीकरती परिवार का विकास,
हर जगह समाज मेंरखती एक अलग सी ख़ास |

इनकी शिक्षण को भारत नेअजब हीं सराहा है,
लाकर योजनाएं इनके प्रतिअलग संवेदना जगाया है |

DOWRY

 

                                        दहेज़ -

सदियों से चला रहाबुराइयों का प्रतीक है,
इसका अलग स्वाभाव हींवर्षों का अतीत है |

सभी जगह फैला हुआकरता काम अजीब है,
नारी का अपमान है भरतारहता एक परजीव है |

हमेशा से निंदा पात्रमाना गया है इसे,
फिर भी मानव वर्ग इसेपूछता आया है ख़ुशी से |

नारियों को बोझ समझकरइसे चुकाना पड़ता है,
खुद कर्ज तले दबकरजीवन बिताना पड़ता है |

समझ गए गर इसका रहनाकितना हीं अभिशाप है,
समाज को नष्ट करनाइसका मूल अभिलाष है |
  

पिता, एक अद्भुत पहचान

 

                    पिता, एक अद्भुत पहचान

पिता, जो है जन्म दाताइंसान एक अविलय,
छोड़ छाप जगत मेंदेता एक अद्भुत परिचय |

रहती एक अलग गरिमानटखट खेलता है संग-संग,
भर उल्लास परिवार मेंपाता एक अद्भुत उमंग |

हर दिन की कोशिश हींआगे का मार्ग दिखाती,
संवार देता बालपनजो जीवन है दर्शाती |

 खुद कठिन हालात कोरहता है निभाता,

देकर मुस्कान लवों कोसदैव है निहारता |

घर का मुखिया रहकरहर कर्म निभाता,
प्रेम भावना लाकरविधाता का फर्ज निभाता |

मानवता एक अलग पहचानसिखाता परिवार जन को,
होता विक्सित मानवदे सबक इस मन को
|

 


पिता की एक अलग भूमिकारहती सदा कठोर है,
सम्भलता परिवार जनजो बांधता एक डोर है |

गढ़ता बालपन कोहोता दूर दोष है,
निखरता फिर समाज मेंअद्भुत सा एक जोश है |

पाल पोश कर बड़ा करताअपने इस अलाव को,
नहीं सोचता आने वालेजीवन के पड़ाव को |

 

हर क्षण आशीष देताअपने इस माया को,

हर पल बचाये रखताकठोरता से काया को |

पाता फिर जीवन का सुखहोती आत्मा फिर विभोर,
खिल-खिलाता उसका चेहराकरता एक अजब सा शोर
|

समय की चपेट में आकरमाया है रंग लाती,
भूलता फिर पिछला जीवनजो संभाली जाती |

बड़े होकर सादगी कोपलभर में भूल जाते,

लाकर तनाव अपनों मेंकलह का भाग्य जगाते |

अगर संस्कार आये तोकाफी भाग्यशाली बन जाता,
रहती अंतरआत्मा प्रशन्नजो नव युग का ज्ञान कराता |

बन पहरेदार परिवार काजगत की रीत जताता,
रखता सदैव अपना आनन्जो सम्मान का हक़ दिलाता
|

TIME

 

समय - 

धन से भी ज्यादा कीमतीसमय है मूल्यवान,
नहीं कोई इसके जैसासबसे यह बलवान |

धन खर्च हो जातापर वापस हमको मिल जाता,
गर एक बार समय बीत जातावह वापस फिर आता |

तो किसी की प्रतीक्षा करताअपने निरंतर चलता रहता,
अगर मित्र बन जाये तोमनुष्य को अग्रसर करके रहता |

सदैव आगे चलता जाताकभी नहीं पीछे है मुड़ता,
नहीं कभी पकड़ में आतासीधी दिशा अपनाते जाता |

तो यह खरीदी जातीनहीं कही बिकी जाती,
ही इसे कुछ दे सकते हैंबस सदुपयोग ही कर सकते हैं |

यही समय पर राह बतातीसमय के साथ चलना सिखाती,
धन, समृद्धि और ख़ुशी सबसाथ इसके चलकर आती
|

 

Sunday, May 30, 2021

WORKER

                   

                                                                     श्रमिक -                                


                                                एक मई को श्रमिक दिवसएक अलग ही पहचान है,

 उनकी कड़ी मेहनत कोदर्शाने का परिधान है |

भवन, अट्टारी और मशीनरीबिन इनके चल पाना है,
 
सही मायने में श्रमिक हीभारत का खजाना है

देश की तरक्की, इन्ही पर निर्भर करती है,
 
जिस तरह मकान के सहारे कोमजबूत नीऊ देनी पड़ती है
  
खून-पसीना एक करअथक परिश्रम करते हैं,

 दिन-रात एक करकेदेश की प्रगति में
अमूल्य योगदान देते हैं

मजदूर समाज का अभिन्नऔर महत्वपूर्ण अंग होता है,

 समाज देश के अग्रसर मेंसदैव हाँथ बटाता है
  
मेहनत ही उसका कर्मयही है उसका धर्म,

 निःस्वार्थ सेवा से हीरहता सदा उसका पराक्रम

हम सभी को उसकीकभी उपेक्षा करनी है,

 साथ दकेर उसकासदैव मानवता रखनी है |

आज जाकर दुनिया नेउनके गरिमा को जाना है,
 
सदैव उनका ख्याल रखकरमानवता का फर्ज निभाया है |

इन्ही की बदौलत हम सबतरक्की को देख पाते हैं,
 
वीरान जगह को विक्सित करये चैन की रोटी कहते हैं
|


सादगी का जीवन प्रहरीरखता सबका ख्याल है,
 
बन विकास की नीव धरा परबनता सबका ढाल है |

विषम परिस्थिति में भी वहसदा मुस्कुराते रहता है,
 
नहीं दीखता थकान बदन पेहर वक्त को गले लगता है |

हम सबको उसका साथ देकरसमाज को आगे बढ़ाना है,
 
जाती-पाती सब छोड़ धरा परहर वर्ग को मार्ग दिखाना है
|

वर्ना ये कामगार जगत सेऐसे गुम हो जायेगा,
 
प्रकृति का विकास यहाँ फिरपलभर में रुक जायेगा |

प्रकृति का उपकार धरा परऐसे नागरिक रहते हैं,
 
बिना अपने परवाह कियेदेश की तर्रकी सोचते हैं |

हमें उनपर गर्व होना हैउन्हें सुधारने का प्रयास करना है,
 
तपते वर्ग के परिवार कोआगे बढ़ने का मार्ग देना है
|

नहीं झुकाते देश की शानरहते सदैव करने को कुर्बान,

उनकी कुर्बानी व्यर्थ करनी हैहमें उनकी परवाह हरदम करनी है |
 
 
कामगारों की तुलना किसी से हो सकती है,
अपनी जगह पर रहकर भीवह सबसे सशक्त दीखते हैं |

सही मायने में वे हीदेश के भाग्य विधाता हैं,
रहें तो चारो ओरहाहाकार का सन्नाटा है
|

इनकी गरिमा को सदाऊपर उठाए रहें,
तभी तो संसार मेंहर क्षेत्र सुदृढ़ रहे |

नहीं रहती ज्यादा की आशहर पल रहता है विश्वास,
भले थोड़े से वेतन सेखिलता रहता वह फास |

उतनी ही पैर फैलाएंचादर जितनी मिल जाये,
अगर सबक सीखना हैतो कामगार को आगे बढ़ायें
|

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