वीरता की आगाज
रेगिस्तान एक मरुभूमि, जहाँ न पानी और, बसेरा बिल्कुल निम्न,
लगता एक विरान, सभी जगहों से भिन्न |
फिर भी आवाज़ आती है, कण-कण से, वीरता की,
मानो पुकारे, आओ सीखें सलीका, जीने की |
विघ्न बाधाओं से भरपूर, अपना राजपुताना,
वर्षों से सिखलाता, वीरता का गाना |
सीखे तो हार न माने, कदम आगे बढ़ना जाने,
न रुकना न थकना, बस चलना जाने......चलना जाने

very good sir.
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