जीवन दायनी इस धरा पर, करती पोषण आपार है,
अपने लाल का कर्म कर, पाती एक अजब सम्मान है |
होती त्याग की प्रतिमूर्ति, प्रेम भाव दर्शाती है,
अपने संतान की खातीर वह, सबकुछ न्योछावर कर जाती है |
माँ बगैर जीवन की, कल्पना भी अधूरी है,
उसके बिना पल पाना, दुनिया की रीत जरुरी है |
ईश्वर का दूजा रूप, सदा झलकता माँ में,
इसके आशीर्वाद सी हीं, सदा जगमगाता संसार में |

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