Monday, May 31, 2021

पिता, एक अद्भुत पहचान

 

                    पिता, एक अद्भुत पहचान

पिता, जो है जन्म दाता, इंसान एक अविलय,
छोड़ छाप जगत में, देता एक अद्भुत परिचय |

रहती एक अलग गरिमा, नटखट खेलता है संग-संग,
भर उल्लास परिवार में, पाता एक अद्भुत उमंग |

हर दिन की कोशिश हीं, आगे का मार्ग दिखाती,
संवार देता बालपन, जो जीवन है दर्शाती |

 खुद कठिन हालात को, रहता है निभाता,

देकर मुस्कान लवों को, सदैव है निहारता |

घर का मुखिया रहकर, हर कर्म निभाता,
प्रेम भावना लाकर, विधाता का फर्ज निभाता |

मानवता एक अलग पहचान, सिखाता परिवार जन को,
होता विक्सित मानव, दे सबक इस मन को
|

 


पिता की एक अलग भूमिका, रहती सदा कठोर है,
सम्भलता परिवार जन, जो बांधता एक डोर है |

गढ़ता बालपन को, होता दूर दोष है,
निखरता फिर समाज में, अद्भुत सा एक जोश है |

पाल पोश कर बड़ा करता, अपने इस अलाव को,
नहीं सोचता आने वाले, जीवन के पड़ाव को |

 

हर क्षण आशीष देता, अपने इस माया को,

हर पल बचाये रखता, कठोरता से काया को |

पाता फिर जीवन का सुख, होती आत्मा फिर विभोर,
खिल-खिलाता उसका चेहरा, करता एक अजब सा शोर
|

समय की चपेट में आकर, माया है रंग लाती,
भूलता फिर पिछला जीवन, जो संभाली न जाती |

बड़े होकर सादगी को, पलभर में भूल जाते,

लाकर तनाव अपनों में, कलह का भाग्य जगाते |

अगर संस्कार आये तो, काफी भाग्यशाली बन जाता,
रहती अंतरआत्मा प्रशन्न, जो नव युग का ज्ञान कराता |

बन पहरेदार परिवार का, जगत की रीत जताता,
रखता सदैव अपना आनन्, जो सम्मान का हक़ दिलाता
|

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