श्रमिक -
एक मई को श्रमिक दिवस, एक अलग ही पहचान है,
उनकी कड़ी
मेहनत को, दर्शाने का
परिधान है
|
भवन, अट्टारी और
मशीनरी, बिन इनके
न चल
पाना है,
सही मायने
में श्रमिक
ही, भारत का
खजाना है
|
देश की तरक्की,
इन्ही पर
निर्भर करती
है,
जिस तरह
मकान के
सहारे को, मजबूत नीऊ
देनी पड़ती
है |
खून-पसीना एक
कर, अथक परिश्रम
करते हैं,
दिन-रात
एक करके, देश की
प्रगति में,
अमूल्य योगदान
देते हैं
|
मजदूर समाज का अभिन्न, और महत्वपूर्ण अंग होता है,
समाज व
देश के
अग्रसर में, सदैव हाँथ
बटाता है
|
मेहनत ही उसका
कर्म, यही है
उसका धर्म,
निःस्वार्थ सेवा से ही, रहता सदा उसका पराक्रम |
हम सभी को उसकी, कभी उपेक्षा न करनी है,
साथ दकेर
उसका, सदैव मानवता
रखनी है
|
आज जाकर दुनिया
ने, उनके गरिमा
को जाना
है,
सदैव उनका
ख्याल रखकर, मानवता का
फर्ज निभाया
है |
इन्ही की बदौलत
हम सब, तरक्की को
देख पाते
हैं,
वीरान जगह
को विक्सित
कर, ये चैन
की रोटी
कहते हैं
|
सादगी का जीवन
प्रहरी, रखता सबका
ख्याल है,
बन विकास
की नीव
धरा पर, बनता सबका
ढाल है
|
विषम परिस्थिति में
भी वह, सदा मुस्कुराते
रहता है,
नहीं दीखता
थकान बदन
पे, हर वक्त
को गले
लगता है
|
हम सबको उसका
साथ देकर, समाज को
आगे बढ़ाना
है,
जाती-पाती
सब छोड़
धरा पर, हर वर्ग
को मार्ग
दिखाना है
|
वर्ना ये कामगार
जगत से, ऐसे गुम
हो जायेगा,
प्रकृति का
विकास यहाँ
फिर, पलभर में
रुक जायेगा
|
प्रकृति का
उपकार धरा
पर, ऐसे नागरिक
रहते हैं,
बिना अपने
परवाह किये, देश की
तर्रकी सोचते
हैं |
हमें उनपर गर्व
होना है, उन्हें सुधारने
का प्रयास
करना है,
तपते वर्ग
के परिवार
को, आगे बढ़ने
का मार्ग
देना है
|
नहीं झुकाते देश
की शान, रहते सदैव
करने को
कुर्बान,
उनकी कुर्बानी व्यर्थ
न करनी
है, हमें उनकी
परवाह हरदम
करनी है
|
कामगारों की
तुलना, न किसी
से हो
सकती है,
अपनी जगह
पर रहकर
भी, वह सबसे
सशक्त दीखते
हैं |
सही मायने
में वे
ही, देश के
भाग्य विधाता
हैं,
न रहें
तो चारो
ओर, हाहाकार का
सन्नाटा है
|
इनकी गरिमा
को सदा, ऊपर उठाए
रहें,
तभी तो
संसार में, हर क्षेत्र
सुदृढ़ रहे
|
नहीं रहती
ज्यादा की
आश, हर पल
रहता है
विश्वास,
भले थोड़े
से वेतन
से, खिलता रहता
वह फास
|
उतनी ही
पैर फैलाएं, चादर जितनी
मिल जाये,
अगर सबक
सीखना है, तो कामगार
को आगे
बढ़ायें |




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