Sunday, May 30, 2021

WORKER

                   

                                                                     श्रमिक -                                


                                                एक मई को श्रमिक दिवस, एक अलग ही पहचान है,

 उनकी कड़ी मेहनत को, दर्शाने का परिधान है |

भवन, अट्टारी और मशीनरी, बिन इनके न चल पाना है,
 
सही मायने में श्रमिक ही, भारत का खजाना है
| 

देश की तरक्की, इन्ही पर निर्भर करती है,
 
जिस तरह मकान के सहारे को, मजबूत नीऊ देनी पड़ती है | 
  
खून-पसीना एक कर, अथक परिश्रम करते हैं,

 दिन-रात एक करके, देश की प्रगति में, 
अमूल्य योगदान देते हैं | 

मजदूर समाज का अभिन्न, और महत्वपूर्ण अंग होता है,

 समाज व देश के अग्रसर में, सदैव हाँथ बटाता है | 
  
मेहनत ही उसका कर्म, यही है उसका धर्म,

 निःस्वार्थ सेवा से ही, रहता सदा उसका पराक्रम | 

हम सभी को उसकी, कभी उपेक्षा न करनी है,

 साथ दकेर उसका, सदैव मानवता रखनी है |

आज जाकर दुनिया ने, उनके गरिमा को जाना है,
 
सदैव उनका ख्याल रखकर, मानवता का फर्ज निभाया है |

इन्ही की बदौलत हम सब, तरक्की को देख पाते हैं,
 
वीरान जगह को विक्सित कर, ये चैन की रोटी कहते हैं
|


सादगी का जीवन प्रहरी, रखता सबका ख्याल है,
 
बन विकास की नीव धरा पर, बनता सबका ढाल है |

विषम परिस्थिति में भी वह, सदा मुस्कुराते रहता है,
 
नहीं दीखता थकान बदन पे, हर वक्त को गले लगता है |

हम सबको उसका साथ देकर, समाज को आगे बढ़ाना है,
 
जाती-पाती सब छोड़ धरा पर, हर वर्ग को मार्ग दिखाना है
|

वर्ना ये कामगार जगत से, ऐसे गुम हो जायेगा,
 
प्रकृति का विकास यहाँ फिर, पलभर में रुक जायेगा |

प्रकृति का उपकार धरा पर, ऐसे नागरिक रहते हैं,
 
बिना अपने परवाह किये, देश की तर्रकी सोचते हैं |

हमें उनपर गर्व होना है, उन्हें सुधारने का प्रयास करना है,
 
तपते वर्ग के परिवार को, आगे बढ़ने का मार्ग देना है
|

नहीं झुकाते देश की शान, रहते सदैव करने को कुर्बान,

उनकी कुर्बानी व्यर्थ न करनी है, हमें उनकी परवाह हरदम करनी है |
 
 
कामगारों की तुलना, न किसी से हो सकती है,
अपनी जगह पर रहकर भी, वह सबसे सशक्त दीखते हैं |

सही मायने में वे ही, देश के भाग्य विधाता हैं,
न रहें तो चारो ओर, हाहाकार का सन्नाटा है
|

इनकी गरिमा को सदा, ऊपर उठाए रहें,
तभी तो संसार में, हर क्षेत्र सुदृढ़ रहे |

नहीं रहती ज्यादा की आश, हर पल रहता है विश्वास,
भले थोड़े से वेतन से, खिलता रहता वह फास |

उतनी ही पैर फैलाएं, चादर जितनी मिल जाये,
अगर सबक सीखना है, तो कामगार को आगे बढ़ायें
|

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