Sunday, May 30, 2021

कामगार


                                   कामगार - 

 

नही थकता नही रुकता कभी, रहता सदैव काम-काज़ पर,
 
समस्त आर्थिक उन्नति टिकी है, हमारे दशे के कामगार पर | 

हर क्षेत्र के निर्माण मे उसका, महत्वपूर्ण ही योगदान है,
 
भवन, पूल, सड़क और कृति, इसके बिन सनुसान हैं |

अपना श्रम बेचकर वह, न्यूनतम मजदूरी पाता है,

बड़े-बड़े क्रियाकलापों को कर, अपना सुकून जताता है |  

जबतक काम करपाने मे, वह सक्षम जान पाता है,
 
जब अशक्त हो जाने पर, औरों पर निर्भर हो जाता है |  

बिना किसी सामाजिक सुरक्षा के, अपना गुजारा करता है, 
फिर भी किसी की, परवाह न कर, 
देश की उन्नति में, सदैव तत्पर रहता है
| 
  

आज जब उनपर संकट की, भरी घटा है छायी,
 
हम सबको आगे बढ़कर, उनकी करनी है भरपाई | 

जगह-जगह ठोकर खाते, फिर भी नित्य चलते जाते,
 
अपने छोर जाने को मजबूर, नहीं सूझ रहा मजदूर | 
  
इस कोरोना ने आकर, ऐसी संकट लाई है,
 
हर क्षेत्र से कामगारों की, पलायन की खबर आई है | 

जूझ रहा परिस्थिति से, नहीं समझ आता कुछ और,
 
इस घडी में ठहरे रहना, यही है एक मंत्र इस दौर | 
  
न कोई धर्म न कोई जाती, परिश्रम ही जीवन लक्ष्य,

यही हरदम दर्शाती | 
  
हरदिन काम कर, दहाड़ी मजदूरी पाता है,

                                                 जिस दिन बीमार पड़े,चूल्हा नहीं जल पाता है | 
 

 
 


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