कामगार -
नही थकता
नही रुकता
कभी, रहता सदैव
काम-काज़
पर,
समस्त आर्थिक
उन्नति टिकी
है, हमारे दशे
के कामगार
पर |
हर क्षेत्र
के निर्माण
मे उसका, महत्वपूर्ण ही
योगदान है,
भवन, पूल,
सड़क और
कृति, इसके बिन
सनुसान हैं
|
अपना श्रम बेचकर वह, न्यूनतम मजदूरी पाता है,
बड़े-बड़े क्रियाकलापों को कर, अपना सुकून जताता है |
जबतक काम
करपाने मे, वह सक्षम
जान पाता
है,
जब अशक्त
हो जाने
पर, औरों पर
निर्भर हो
जाता है
|
बिना किसी
सामाजिक सुरक्षा
के, अपना गुजारा
करता है,
फिर भी
किसी की, परवाह न
कर,
देश की
उन्नति में, सदैव तत्पर
रहता है
|
आज जब
उनपर संकट
की, भरी घटा
है छायी,
हम सबको
आगे बढ़कर, उनकी करनी
है भरपाई
|
जगह-जगह ठोकर
खाते, फिर भी
नित्य चलते
जाते,
अपने छोर
जाने को
मजबूर, नहीं सूझ
रहा मजदूर
|
इस कोरोना
ने आकर, ऐसी संकट
लाई है,
हर क्षेत्र
से कामगारों
की, पलायन की
खबर आई
है |
जूझ रहा
परिस्थिति से, नहीं समझ
आता कुछ
और,
इस घडी
में ठहरे
रहना, यही है
एक मंत्र
इस दौर
|
न कोई धर्म
न कोई
जाती, परिश्रम ही
जीवन लक्ष्य,
यही हरदम
दर्शाती |
हरदिन काम कर, दहाड़ी मजदूरी पाता है,


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