जीने की चाह -
जाड़े की शुरुवात में, बधाई का कहर आया,
देकर सुन्दर लाल को, ईश्वर ने डगर दिखाया |
जताया बुढ़ापे का सहारा, नहीं भटकेगा बेसहारा,
ले अपनी मजबूत लाठी, दी है इसे भरपूर माटी |
सोचा बड़े आराम से, कट जाएगी जिंदगी,
पता न था समय का, कब पलट जाएगी बंदगी |
समय से पहले हीं, लाचार हो गया,
सोचते-सोचते ही, अलविदा कह गया |
आश कभी न करना, यही एक सन्देश,मिले तो ईश्वर कृपा, वरना ईश्वर इच्छा समझना |

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