भोर की बेला में, चिड़िओ का कलरव,
गूंजता एक सन्देश, नयी चेतना संग मधुरव |
पूरे दिन ताजगी राह जाती, काम-काज सम्हाली जाती,
नहीं होता एक पल थकान, पूरे काम फिर चला मकान |
फिरते अपने-अपने छोर, करते नित्य मधुर स्वर गाना |
सीख अगर जो ली जावे, सदा मधुर वाणी आवे,
मुस्कान रहे हर फेस वहीँ, न पहुंचे कभी ठेस कहीं |

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