पुत्र प्रेम -
देखते हीं लगा जैसे, बांहो में भर लूँ,
और खुश होकर, माथे को चुम लूँ |
मेरा वत्स, काफी दिनों बाद,
घर पर दस्तक लाया,
लगा जैसे आँखे, मानो इंतजार करती,
बीते हुए यादों से, जैसे गुजारा करती |
आज जाकर मिली है, मुझे दिली इच्छा,जिससे मिलाना था मुझे, उसने ही की उपेक्षा |

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