Friday, May 28, 2021

पुत्र प्रेम

 

                                    पुत्र प्रेम -

देखते हीं लगा जैसेबांहो में भर लूँ,
और खुश होकरमाथे को चुम लूँ |

मेरा वत्सकाफी दिनों बाद,
घर पर दस्तक लाया,
आते हीं उसे मैंनेअपने गले लगाया |

 

लगा जैसे आँखेमानो इंतजार करती,
बीते हुए यादों सेजैसे गुजारा करती |

आज जाकर मिली हैमुझे दिली इच्छा,
जिससे मिलाना था मुझेउसने ही की उपेक्षा |

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