Friday, May 28, 2021

अज्ञानता

                                                                             

                                        
                                    अज्ञानता -

चारो ओर फ़ैल रहीअज्ञानता की आग,
जाने कब लौटेगीजो चेतना गई है भाग |

दिखावे पे चलते लोगखो दिए हैं ज्ञान,
ताम में रहने की मानोनिकाल पड़े हैं ठान
|

डूबती विकास की नैयाखुद ही बने है खेवैया,

सोच समझ आताफिर भी मन है पछताता |

भटकते फिर रहे हैं डगरनहीं रही इन्हें नजर,
जब अज्ञानता जाएगीरौशनी की ब|री आएगी,

तब होगा समय की मारक्यों रोये देख अपनी हार |

No comments:

Post a Comment

Paras books