काले घनेरे बादलों की, ऐसी छटा छाई,
दिन दोपहरी बेला में, रात्रि सी भर आई |
गरजने और बरसने की, धुन जरा सी भाई,
पल भर में चारो तरफ, पानी ही भर लायी |
नदी नाले लबा लब, और हुए खेत खलियान,
मिटी धरा की प्यास, झूम उठे सब प्रकृतिवान |
पल भर में हरियाली ने, लाकर दस्तक दुहराई,
ख़ुशी लौटी चारों ओर, दे ईश्वर की दुहाई |

very nice sir
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