Saturday, May 29, 2021

अपनापन

     

              

                                      अपनापन -

गीत गर गुनगुनाऊं, तो बिछड़े याद आये,

लिखने गर जाऊं, तो जीवनी सामने आये |  

खूब कहा किसी ने, यादो का सिलसिला,

बस युही चलता जाता हैं, सोचो तो अपने, वर्ना राही छूट जाता है | 

 जीवन है एक मंच जहाँ, नाट्य भाव आ जाते हैं, 

खोखले उम्मीदों पे, सद्भाव दिखाए जाते हैं |  

कैसे कहु उसे, न पता न याद,

न जाने किस पहर, करले फरियाद |

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