गीत गर गुनगुनाऊं, तो बिछड़े याद आये,
लिखने गर जाऊं, तो जीवनी सामने आये |
खूब कहा किसी ने, यादो का सिलसिला,
बस युही चलता जाता हैं, सोचो तो अपने, वर्ना राही छूट जाता है |
जीवन है एक मंच जहाँ, नाट्य भाव आ जाते हैं,
खोखले उम्मीदों पे, सद्भाव दिखाए जाते हैं |
कैसे कहु उसे, न पता न याद,
न जाने किस पहर, करले फरियाद |

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