Monday, June 7, 2021

प्रकृति की देन

 

                                    प्रकृति की देन -

  

खामोश खड़े हुए वन, जाने अनजाने में,

बहुत कुछ समझा जाते हैं, समझे तो गनीमत,

वर्ना फिर, अपना दृश्य दिखा जाते हैं |

जो भी जरुरत है, उसे हम आसानी से,

पा लेते हैं, क्यूँकि, प्रकृति के सौंदर्य, ने ही,

इसे आसानी से, उपलब्ध कराया है |

अगर यदि देखें तो, वायु,जल ,अन्न,

सबके श्रोत हैं वन |

लेकिन आज हमारी सीमाएँ, बढ़ सी गयी है,

और यही कारण है, कि प्रकृति की सुंदरता भी,

घट सी गयी है |


मिट रहा धरती का सौंदर्य, दिखता सिर्फ व्यापार है,

अगर कदम न हटे तो, विकास का संहार है |

जीवन अपना संभव है, प्रकृति के बने रहने से,

भू-मंडल भी खिलता है, इसके हरे-भरे रहने से |

बन जीवन का आधार, अपना रूप बदलती है,

अलग-अलग जगहों पर, तरह-तरह के,

संसाधन उपलब्ध कराती है | 

बिखेर छटा धरा पर, अपना श्रृंगार दिखाती है,

देकर हमारी आत्मा को, आखों को सुकून पहुँचाती है |

बना संतुलन भूमि पर, जीवन का संतुलन रखती है,

गर बिगड़ गए संतुलन तो, जीवन का आकलन करती है |

 

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