प्रकृति की देन -
खामोश खड़े हुए वन, जाने अनजाने में,
बहुत कुछ समझा जाते हैं, समझे तो गनीमत,
वर्ना फिर, अपना दृश्य दिखा जाते हैं |
जो भी जरुरत है, उसे हम आसानी से,
पा लेते हैं, क्यूँकि, प्रकृति के सौंदर्य, ने ही,
इसे आसानी से, उपलब्ध कराया है |
अगर यदि देखें तो, वायु,जल ,अन्न,
सबके श्रोत हैं वन |
लेकिन आज हमारी सीमाएँ, बढ़ सी गयी है,
और यही कारण है, कि प्रकृति की सुंदरता भी,
घट सी गयी है |
मिट रहा धरती का सौंदर्य, दिखता सिर्फ व्यापार है,
अगर कदम न हटे तो, विकास का संहार है |
जीवन अपना संभव है, प्रकृति के बने रहने से,
भू-मंडल भी खिलता है, इसके हरे-भरे रहने से |
बन जीवन का आधार, अपना रूप बदलती है,
अलग-अलग जगहों पर, तरह-तरह के,
संसाधन उपलब्ध कराती है |
बिखेर छटा धरा पर, अपना श्रृंगार दिखाती है,
देकर हमारी आत्मा को, आखों को सुकून पहुँचाती है |
बना संतुलन भूमि पर, जीवन का संतुलन रखती है,
गर बिगड़ गए संतुलन तो, जीवन का आकलन करती है |


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