लेखनी की ताकत -
उठा लेखनी आज, कुछ ऐसा रच अभिलाष,
जन्मो तक ना मिटे, जो बन जाये इतिहास |
कितनी ताकतवर है, पता अभी लग जाएगा,
पढ़ने वाले टूट पड़ेंगे, जब तृष्णा फुट आएगा |
जैसे पृथ्वी की सैर में, सरिता जल जड़े हैं |
नहीं कोई आश, फिर भी पहचान अजीब सा,
लिखे तो आसमान छू ले, और बैठे तो निरीह सा |

Lajwab koi jawab hi nhi apke soch ....sbse alag
ReplyDeletesuper sir.
ReplyDeleteBahut Badhia sir jii
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