त्याग -
दीपक की आगाज, फैले उजियारा,
ना रहे तम, मिटे सब अँधियारा |
लौ बस जलती जाये, जीवन को गतिशील बनाये,
ना हो रुकने का एहसास, फिर हो जाओ बस खुशहाल.
खुशहाली एक प्रीत निराली, लगी मन को भाने,
बन जायेगा जीवन चक्र, लगेगा जब मन अपनाने
very energetic
very energetic
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